Updated: May 07, 2026
हाल ही में सोशल मीडिया पर गुजरात के सूरत स्थित डुमस बीच और कुछ अन्य समुद्री इलाकों के वीडियो तेजी से वायरल हुए, जिनमें समुद्र का पानी काफी दूर तक पीछे हटता दिखाई दिया। कई लोगों ने दावा किया कि समुद्र लगभग 1 किलोमीटर तक पीछे चला गया, जिससे लोगों में डर और जिज्ञासा दोनों बढ़ गए।
कुछ लोगों ने इसे सुनामी का संकेत बताया, तो कुछ ने इसे प्राकृतिक घटना कहा। ऐसे में सवाल उठता है:
इस लेख में हम पूरी जानकारी आसान भाषा में समझेंगे।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो मुख्य रूप से:
से जुड़े बताए जा रहे हैं। यह वीडियो मई 2026 के शुरुआती दिनों में वायरल हुए। कई स्थानीय पोस्ट और वीडियो में समुद्र का पानी काफी पीछे जाता दिखा।
वैज्ञानिक रूप से देखा जाए तो समुद्र का पानी कई बार सामान्य रूप से काफी पीछे चला जाता है। इसे:
इस दौरान:
सूरत के डुमस बीच पर यह घटना पहले भी कई बार देखी गई है क्योंकि वहां tidal range काफी ज्यादा है।
समुद्र में ज्वार-भाटा मुख्य रूप से चंद्रमा और सूर्य की गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण होता है।
यह पूरी तरह प्राकृतिक प्रक्रिया है।
गुजरात के कई समुद्री क्षेत्रों में समुद्र का तल काफी सपाट है।
इस वजह से:
इसी कारण डुमस बीच जैसे इलाकों में यह दृश्य ज्यादा दिखाई देता है।
कई बार:
भी समुद्र के जल स्तर को प्रभावित करते हैं।
यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है।
सुनामी से पहले भी समुद्र का पानी तेजी से पीछे हट सकता है, लेकिन हर बार ऐसा होना सुनामी का संकेत नहीं होता।
सूरत में वायरल वीडियो के मामले में विशेषज्ञों और स्थानीय रिपोर्ट्स के अनुसार यह सामान्य “लो टाइड” घटना मानी जा रही है।
अगर समुद्र अचानक:
तो यह सुनामी का संकेत हो सकता है।
ऐसी स्थिति में:
मुंबई समेत कई तटीय शहरों में ज्वार-भाटा सामान्य बात है।
हालांकि:
लेकिन हर घटना खतरनाक नहीं होती।
विशेषज्ञ मानते हैं कि climate change समुद्री गतिविधियों को प्रभावित कर रहा है।
इसके कारण:
बढ़ रहे हैं।
हालांकि सूरत वाली घटना को सीधे climate change से जोड़ना सही नहीं होगा।
सोशल मीडिया पर कई वीडियो बिना सही जानकारी के वायरल हो जाते हैं।
कुछ लोगों ने:
जैसे दावे करना शुरू कर दिए।
लेकिन जांच और रिपोर्ट्स में यह सामान्य tidal activity बताई गई।
हाँ, भारत के कई समुद्री तटों पर:
में समय-समय पर समुद्र पीछे जाता देखा गया है।
यह सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
इसलिए वैज्ञानिक निगरानी और जागरूकता बेहद जरूरी है।
सूरत और अन्य तटीय इलाकों में समुद्र का पानी पीछे जाना फिलहाल एक सामान्य प्राकृतिक “लो टाइड” घटना मानी जा रही है। हालांकि सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई अफवाहें फैलीं, लेकिन विशेषज्ञों ने इसे सामान्य समुद्री प्रक्रिया बताया है।
फिर भी समुद्र से जुड़ी किसी भी असामान्य घटना को हल्के में नहीं लेना चाहिए। सही जानकारी और सतर्कता ही सुरक्षा का सबसे बड़ा उपाय है।